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बुधवार, 1 अप्रैल 2009


जीवन की जदोजहद में


कहाँ जरूरत थी


'जय हो' गाने की


 रोटी की लडाई में


कहाँ फुर्सत थी

4 टिप्‍पणियां:

prabhakar ने कहा…

sach kaha.....roti me ladai me kahan fursat hai....kise fursat hai......

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 09/10/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

Kuldeep Sing ने कहा…

सुंदर भाव... शब्दों में चमतकार है... धन्यवाद http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com

Madan Mohan Saxena ने कहा…

शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन....बहुत खूब
बेह्तरीन अभिव्यक्ति