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रविवार, 20 जून 2010

गुरु चेला संवाद-2

गुरु-- "चेला, हिन्दू-मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते।"
चेला-- "क्यों गुरुदेव?"
गुरु-- "दोनों में बड़ा अन्तर है।"
चेला-- "क्या अन्तर है?"
गुरु-- "उनकी भाषा अलग है...हमारी अलग है।"
चेला-- "क्या हिन्दी, कश्मीरी, सिन्धी, गुजराती, मराठी, मलयालम, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बंगाली आदि भाषाएँ मुसलमान नहीं बोलते...वे सिर्फ़ उर्दू बोलते हैं?"
गुरु-- "नहीं...नहीं, भाषा का अन्तर नहीं है...धर्म का अन्तर है।"
चेला-- "मतलब दो अलग-अलग धर्मों के मानने वाले एक देश में नहीं रह सकते?"
गुरु-- "हाँ...भारतवर्ष केवल हिन्दुओं का देश है।"
चेला-- "तब तो सिखों, ईसाइयों, जैनियों, बौद्धों, पारसियों, यहूदियों को इस देश से निकाल देना चाहिए।"
गुरु-- "हाँ, निकाल देना चाहिए।"
चेला-- "तब इस देश में कौन बचेगा?"
गुरु-- "केवल हिन्दू बचेंगे...और प्रेम से रहेंगे।"
चेला-- "उसी तरह जैसे पाकिस्तान में सिर्फ़ मुसलमान बचे हैं और प्रेम से रहते हैं?"
असग़र वजाहत

2 टिप्‍पणियां:

karishna ने कहा…

लिखने के लिए कुछ अपना भी है या सब कुछ इधर उधर से इकट्ठा कर रखा है.

skmeel ने कहा…

karishna ji hum aapki tarah vidwan nahi hai...is baat ka hume puri jingi dukh rahega.